शोधार्थी विषय वस्तु की गहराई में जाकर करें शोध

विशिंष्ट अतिथि डॉ सुरेश पाण्डेय ने भारतीय राष्ट्रवाद को प्राचीनतम बताते हुए कहा कि अपने मूल से जुड़े रहकर ही हम राष्ट्र की सेवा कर सकते हैँ! अपने सम्बोधन में अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने शोधार्थियों को विषय वस्तु के गहराई में जाकर शोध करने का आह्वान किया!इसके पूर्व, यूनिवर्सिटी के पूर्व सीनेटर डॉ अरुण कुमार सिंह ने दो -दिवसीय सेमिनार की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की!विभागाध्यक्ष डॉ नीलम कुमारी ने अपने स्वागत सम्बोधन में राष्ट्रवाद पर हुई चर्चा को ऐतिहासिक बतलाया!धन्यवाद ज्ञापन समाज विज्ञान की डीन डॉ संगीता रानी ने किया!कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अमर बहादुर शुक्ला सहित अन्य विभागीय सहयोगियों का योगदान अभूतपूर्व रहा! कार्यक्रम में अन्यलोगों के अलावा डॉ जीतेन्द्र नारायण,डॉ अनिल कुमार ओझा, डॉ संजय कुमार, डॉ शरदेंदु शेखर, डॉ ममता रानी, बर्दवान यूनिवर्सिटी की डॉ प्रियंका दत्ता चौधरी, डॉ देवेंद्र प्रसाद तिवारी, डॉ पंकज कुमार सिंह एवं सैकड़ो शोधार्थियों ने भाग लिया और विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे।" />
शोधार्थी विषय वस्तु की गहराई में जाकर करें शोध

विशिंष्ट अतिथि डॉ सुरेश पाण्डेय ने भारतीय राष्ट्रवाद को प्राचीनतम बताते हुए कहा कि अपने मूल से जुड़े रहकर ही हम राष्ट्र की सेवा कर सकते हैँ! अपने सम्बोधन में अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने शोधार्थियों को विषय वस्तु के गहराई में जाकर शोध करने का आह्वान किया!इसके पूर्व, यूनिवर्सिटी के पूर्व सीनेटर डॉ अरुण कुमार सिंह ने दो -दिवसीय सेमिनार की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की!विभागाध्यक्ष डॉ नीलम कुमारी ने अपने स्वागत सम्बोधन में राष्ट्रवाद पर हुई चर्चा को ऐतिहासिक बतलाया!धन्यवाद ज्ञापन समाज विज्ञान की डीन डॉ संगीता रानी ने किया!कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अमर बहादुर शुक्ला सहित अन्य विभागीय सहयोगियों का योगदान अभूतपूर्व रहा! कार्यक्रम में अन्यलोगों के अलावा डॉ जीतेन्द्र नारायण,डॉ अनिल कुमार ओझा, डॉ संजय कुमार, डॉ शरदेंदु शेखर, डॉ ममता रानी, बर्दवान यूनिवर्सिटी की डॉ प्रियंका दत्ता चौधरी, डॉ देवेंद्र प्रसाद तिवारी, डॉ पंकज कुमार सिंह एवं सैकड़ो शोधार्थियों ने भाग लिया और विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे।" />

Thursday, April 03 2025

भारत के धर्म और पश्चिम के धर्म में सबसे बड़ा अंतर वैश्विक व ब्रह्मांडीय चेतना का है : डाॅ राकेश सिंहा

FIRSTLOOK BIHAR 06:20 AM बिहार

मुजफ्फरपुर : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को सकारात्मक भाव से ही परिभाषित किया जा सकता है, भारत वर्ष में निवास करने वाले सभी लोग उसके हिस्सेदार हैँ!भारत के धर्म और पश्चिम के धर्म में सबसे बड़ा अंतर वैश्विक चेतना और ब्रह्मांडीय चेतना का है!गाँधी ने ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ कर काम किये अतः वह काल जई हो गए!ये बातें बी आर ए बिहार विश्वविद्यालय राजनीतिक विज्ञान विभाग द्वारा "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विकास का इतिहास "विषय पर आयोजित दो -दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के समापन समारोह में वतौर मुख्य अतिथि दिल्ली यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्राध्यापक और पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ राकेश सिन्हा ने कही!उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रवाद में असहमति और आलोचना की पूरी छूट है!यहां एक ही घर में कोई नास्तिक है तो दूसरा ईश्वर की सत्ता में विश्वास करने वाला, इसीलिए कवि रवींन्द्र नाथ टैगोर के भारत को एक बार फिर से पुनर्जन्म लेने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि दुनियां का भविष्य सुरक्षित रह सके!

शोधार्थी विषय वस्तु की गहराई में जाकर करें शोध

विशिंष्ट अतिथि डॉ सुरेश पाण्डेय ने भारतीय राष्ट्रवाद को प्राचीनतम बताते हुए कहा कि अपने मूल से जुड़े रहकर ही हम राष्ट्र की सेवा कर सकते हैँ! अपने सम्बोधन में अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने शोधार्थियों को विषय वस्तु के गहराई में जाकर शोध करने का आह्वान किया!इसके पूर्व, यूनिवर्सिटी के पूर्व सीनेटर डॉ अरुण कुमार सिंह ने दो -दिवसीय सेमिनार की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की!विभागाध्यक्ष डॉ नीलम कुमारी ने अपने स्वागत सम्बोधन में राष्ट्रवाद पर हुई चर्चा को ऐतिहासिक बतलाया!धन्यवाद ज्ञापन समाज विज्ञान की डीन डॉ संगीता रानी ने किया!कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अमर बहादुर शुक्ला सहित अन्य विभागीय सहयोगियों का योगदान अभूतपूर्व रहा! कार्यक्रम में अन्यलोगों के अलावा डॉ जीतेन्द्र नारायण,डॉ अनिल कुमार ओझा, डॉ संजय कुमार, डॉ शरदेंदु शेखर, डॉ ममता रानी, बर्दवान यूनिवर्सिटी की डॉ प्रियंका दत्ता चौधरी, डॉ देवेंद्र प्रसाद तिवारी, डॉ पंकज कुमार सिंह एवं सैकड़ो शोधार्थियों ने भाग लिया और विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे





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