Tuesday, March 17 2026

स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं,बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य भी है : डाॅ अरुण शाह

FIRSTLOOK BIHAR 05:05 AM स्वाथ्य सेहत

मुजफ्फरपुर : 30 जनवरी को राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूक होना है वास्तव में स्वच्छता  स्वस्थ जीवन की नींव है राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस के इस अवसर पर ब्रह्मपुरा स्थित डॉक्टर अरुण शाह के क्लीनिक में  भारतीय बाल एकेडमी के तहत स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया



जिसमें मुख्य वक्ता डॉक्टर अरुण शाह थे, कार्यक्रम में शहर और गांव के मरीज बड़ी संख्या में उपस्थित थे



इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डाॅ अरूण शाह ने कहा कि ​​ एक स्वस्थ्य शरीर और स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ मन और सुखी जीवन का आधार है आज के आधुनिक युग में,जहाँ प्रदूषण और नई बीमारियाँ बढ़ रही हैं, स्वच्छता का महत्व और भी बढ़ गया है

​स्वच्छता और स्वास्थ्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जब हम अपने शरीर और परिवेश को साफ रखते हैं, तो हम सूक्ष्मजीवों ( बैक्टीरिया और वायरस) के प्रसार को रोकते हैं अधिकांश बीमारियाँ—जैसे दस्त, टाइफाइड, पेचिश पीलिया  के गंदगी के कारण ही फैलती हैं डाॅ शाह ने कहा कि ​हमें  व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना होगा जैसे, ​हाथ धोना: हमारे हाथ दिन भर में कई वस्तुओं के संपर्क में आते हैं खाना खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना संक्रमण के खतरे को 40% तक कम कर सकता है

​ नियमित स्नान करने से शरीर के रोमछिद्र खुले रहते हैं और त्वचा संबंधी रोग (जैसे खुजली, दाद) नहीं होते उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिदिन दो बार ब्रश करने से दाँत सड़ने और मसूड़ों की बीमारियों से बचाव होता है

​हमारा घर वह स्थान है जहाँ हम सबसे अधिक समय बिताते हैं यदि घर में धूल, नमी या गंदगी होगी, तो यह अस्थमा और एलर्जी जैसी सांस की बीमारियों का कारण बन सकती है

​भोजन पकाने का स्थान सबसे स्वच्छ होना चाहिए बासी भोजन और गंदे बर्तनों से गंभीर बीमारी हो सकती है​ घर के कूड़े को ढककर रखना चाहिए और गीले व सूखे कचरे को अलग करना चाहिए खुला कचरा मक्खियों और मच्छरों को आमंत्रित करता है, जो मलेरिया और डेंगू फैलाते हैं

डाॅ शाह ने कहा कि ​स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य भी है दूषित पानी दुनिया भर में बीमारियों का सबसे बड़ा स्रोत है

जल स्रोतों के पास गंदगी न फैलाना और पानी को उबालकर या छानकर पीना स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है ​ खुले में शौच न करने से मिट्टी और जल का प्रदूषण रुकता है, जिससे बच्चों में कुपोषण और संक्रमण कम होता है ​स्वच्छता का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है ​एक साफ-सुथरा कमरा या कार्यालय तनाव को कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है ​अव्यवस्थित और गंदा वातावरण मस्तिष्क में नकारात्मकता और चिड़चिड़ापन पैदा करता है

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