Wednesday, May 13 2026

कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय के नेतृत्व में शोध टीम ने पलाश के फूलों से तैयार हर्बल कोम्बुचा, वैश्विक बाजार के लिए खोले नए द्वार

FIRSTLOOK BIHAR 13:03 PM शिक्षा

भारतीय वनस्पति विज्ञान और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, बीएचयू की शोध टीम ने सीनियर प्रोफेसर तथा वर्तमान में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय के नेतृत्व में पारंपरिक औषधीय फूल पलाश से एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट युक्त कोम्बुचा पेय विकसित किया है यह शोध विश्वप्रसिद्ध एल्सेवियर ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय जर्नल फूड एंड ह्यूमैनिटी के 2026 के अंक में प्रकाशित हुआ है यह शोध एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है, जिसमें बीएचयू के डेयरी विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग से सुमन भारती और अरविन्द कुमार के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी के सीएएसएस फूड रिसर्च सेंटर से आकांक्षा गुप्ता शामिल रहीं





शोध टीम की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि यह शोध स्थानीय से वैश्विक की दिशा में एक बड़ा कदम है



पलाश जैसे पारंपरिक भारतीय फूलों की औषधीय शक्ति को आधुनिक विज्ञान के माध्यम से दुनिया के सामने लाना उनके शोध टीम की बड़ी उपलब्धि है प्रो. राय ने कहा कि, यह अनुसंधान न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक बेहतर विकल्प प्रदान करेगा, बल्कि हमारे ग्रामीण संसाधनों के मूल्यवर्धन के जरिए किसानों के लिए समृद्धि के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा

उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक तकनीकों जैसे हाई-रिज़ॉल्यूशन सटीक मास स्पेक्ट्रोमेट्री और एटीआर-एफटीआईआर के जरिए यह सिद्ध किया कि किण्वन की प्रक्रिया पलाश के फूलों की जैविक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है शोध के दौरान यह पाया गया कि किण्वन के बाद पलाश कोम्बुचा में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि में 22.78% का इजाफा हुआ और पेय में कुल फेनोलिक सामग्री 126.77 से बढ़कर 263.54 mg प्रति 100 ग्राम हो गई इसके अतिरिक्त, विश्लेषण में होमोब्यूटिन 4-ग्लूकोसाइड और क्वेरसेटिन-3B-D-ग्लूकोसाइड जैसे नए मेटाबोलाइट्स की पहचान हुई, जो अपने सूजन-रोधी और तंत्रिका तंत्र की सुरक्षा गुणों के लिए विश्व स्तर पर जाने जाते हैं

प्रो राय ने आगे कहा कि व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी यह शोध मील का पत्थर साबित हो सकता है यह तकनीक न केवल भारतीय आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पलाश जैसे कम उपयोग होने वाले फूलों के माध्यम से सतत कृषि और जैव विविधता को भी सहारा देगी दोनों विश्वविद्यालय के शैक्षणिक समुदाय और एलुमनी एसोसिएशन ने प्रो. राय को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में भारत की संप्रभुता को और मजबूती प्रदान करेगा



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