मुजफ्फरपुर 4 सितम्बर 2026 : विशाल भारत केवल आर्थिक समृद्धि का लक्ष्य नहीं बल्कि समृद्ध ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं ज्ञान-आधारित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है इसी व्यापक दृष्टिकोण को केन्द्र में रखते हुए राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा संपोषित Role and Relevance of Bhartiya Gyan Parampara in Vishal Bharat विषय पर दो दिवसीय 5 एवं 6 सितम्बर 2026) राष्ट्रीय सेमिनार ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, मुजफ्फरपुर में आयोजित किया जा रहा है
भारतीय ज्ञान परंपरा सदियों से ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, शिक्षा, प्रबंधन, स्वास्थ, पर्यावरण संरक्षण एवं माननीय मूल्यो का समृद्ध स्रोत रही है
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इस विरासत की प्रासंगिकता और बढ़ गई है
सेमिनार में इसी दृष्टिकोण से विचार-विमर्श की पृष्ठभूमि तैयार की गयी है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित अनुभव एवं जीवन-दृष्टि विशाल भारत के निर्माण की आधारशिला कैसे बन सकती है भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आर्थिक प्रगति के साथ ज्ञान, नवाचार, नैतिकता, सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देना आवश्यक है
यह दो दिवसीय सेमिनार शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन महत्व को समझने तथा इस क्षेत्र में शोध एवं अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा बो० आर० अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रोफेसर (डा०) दिनेश चंद्र राय जो सेमिनार में मुख्य अतिथि होंगे प्रो० राजेश्वर कुमार, सह-प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, नालन्दा विश्वविद्यालय उद्घाटन सत्र में की नोट स्पोकर होंगे प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता के रुप में प्रोफेसर (डा०) अरुण कुमार भगत, मोडिया स्टडीज विभाग, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी भी सेमिनार में भाग लेंगे सेमिनार में डा० अभिषेक पांडेय, डा० अंजनी कुमार श्रीवास्तव, डा० पाथलांब ओमकार, प्रो० रंजन कुमार बहेड़ा, डा० राम नाथ झा एवं डा० वर्णिका शर्मा अलग अलग सत्रों में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियो, विद्यार्थियों, विशेषज्ञों और विशिष्ट क्षेत्र में काम करने वाले पशंवर्ग को मेमिनार में भाग लेने का आमंत्रण दिया गया है विभिन्न सत्रों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषताओं तथा वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की जाएगी