मुजफ्फरपुर : ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेन्ट, मुजफ्फरपुर में महाविद्यालय की स्थापना के 51वें वर्ष और संस्था के सूत्रधार पं. ललित नारायण मिश्र की 101वें जन्म-दिवस पर वार्षिकोत्सव-सह-ललित जयंती समारोह आयोजित की गई
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया महाविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कुमार शरतेन्दु शेखर के द्वारा सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ और शाल मेमोन्टम देकर स्वागत किया गया
महाविद्यालय के निदेशक डॉ. मनीष कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि विगत 51 वर्षों की गरिमामय यात्रा में संस्थान अपने छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रही है
महाविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष स्व. डॉ. जगन्नाथ मिश्र की दूर-दर्शिता एवं सामाजिक सोच को प्रदर्शित करते हुए विभिन्न प्रकार के रोजगार परक शिक्षा के क्षेत्र में यह महाविद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है उन्होंने यह भी बताया कि महाविद्यालय अपने शैक्षणिक कार्यक्रम में अन्य कोर्सों को भी सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है महाविद्यालय कुछ और व्यवसायिक कोर्सों को लागू करने जा रहा है जिसके अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो हमारे विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ व्यक्तित्व निर्माण के लिए भी उपयोगी है और भारत सरकार के एक भारत-श्रेष्ठ भारत के मूल नीतियों का अक्षरशः अनुकरण कर रही है
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सराहा
मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. (डॉ.) आशीष श्रीवास्तव (डीन शिक्षा विभाग, महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी) ने अपने सम्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शिक्षा के प्रति दूर-दर्शिता एवं प्रभावी मार्गदर्शन में भारत ने अपने शिक्षा व्यवस्था में विस्तृत परिवर्तन करने की पहल की है कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 29 जुलाई, 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई 34 वर्षों के बाद भारत के शिक्षा व्यवस्था में इस बदलाव का मूल उद्देश्य सभी वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है जिसका लक्ष्य शिक्षा को सार्वभौमिक बनाना है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2025 तक में राष्ट्र अपने इस नीति के तहत मूलभूत शिक्षा सहित छात्रों में विभिन्न कौशल का विकास करना है उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल मंत्र बहुविषयक्ता एवं समग्र शिक्षा है, जिसमें छात्रों को संख्यात्मक एवं टेक्नोलिजिकल समझ का विकास करना, गणितीय सोच का विकास, समस्या समाधान कौशल की प्रवीणता प्रदान करना जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्किल इण्डिया यानी निपुण भारत पहल का मुख्य भाग है उन्होंने निपुण भारत योजना का दूसरा स्वरूप शिक्षक क्षमता का निर्माण, उच्च गुणवत्ता के संसाधनों को प्रदान करना, छात्रों के सोब को और समृद्ध करना. छात्रों के कौशल का उचित मूल्यांकन सहित सभी बिन्दुओं पर प्रकाश डाला
मूल रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति समानता, संवर्द्धन, गुणवत्ता, सार्वभौमिकता के सभी आधार स्तम्भों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि माननीय प्रधानमंत्री का मूल उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में विकसित करना है डॉ. श्रीवास्तव ने उच्च गुणवत्ता प्रबंधन से उपर उठकर पूर्ण गुणवत्ता पर विस्तार से बताते हुए कहा कि पारंपरिक शिक्षा के अनुरूप ही यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 क्रान्तिकारी बदलाव का एक प्रभावी स्वरूप है जिससे शिक्षा व्यवस्था और सुदृढ़ होकर मानव विकास में पूर्ण सहयोग करेगा, जो युवा शक्ति को अपने कौशल विकास से भारत विकास तक साझा करने के लिए मूल स्रोत है
युवा शक्ति से किया आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता नीतीश मिश्रा बिहार विधान सभा सदस्य (सभापति, शून्यकाल समिति) बिहार सरकार ने किया अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में इस ललित जयंती के अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी बदलाव के संदर्भ में कहा कि इस टेक्नोलॉजी के समय में टेक्नोलॉजी का समुचित उपयोग करना बुद्धिमानी है एवं इसके दुष्प्रभाव से बचना सावधानी है युवा शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि इस अमृत अवसर को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विचार में उत्कृष्टता लायें आत्म विश्वास को बढ़ायें और जीवन में सफलता प्राप्त करें उत्कृष्ट उद्देश्य के लिए संवृद्ध विचार एवं दृढ संकल्प के साथ कार्य करना होगा इसमें जो भी सहयोग की अपेक्षा छात्रों को होगी वह सहयोग महाविद्यालय प्रदान करेगा छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए विकसित भारत के अभियान को सफल बनाने का आहवान किया
महाविद्यालय के शिक्षण व्यवस्था की सराहना
समारोह का उद्घाटन बिहार विधान परिषद् सदस्य, माननीय प्रो. (डॉ.) संजय कुमार सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि ललित बाबू और महाविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. जगन्नाथ मिश्र जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी दूरदर्शिता को नमन किया उन्होंने कहा कि आज से 50 वर्ष पहले जब हमारा प्रक्षेत्र आर्थिक रूप से अत्यंत ही कमजोर था, उस समय में इन दो पुरोधाओं की दूरदर्शिता से संस्थान की स्थापना हो पायी परिणामस्वरूप आज हमारे क्षेत्र के छात्र भी देश के विभिन्न उद्योगों में कैरियर बनाकर संस्थान का नाम रौशन कर रहे हैं शायद यह संस्थापक बंधुओं की उस मौलिक सोच से प्रेरित है जिसमें उनका जन्म हुआ और वह बाढ़ की विभिषिका की वजह से अत्यंत पीडित एवं पिछड़ा क्षेत्र से थे वहाँ के विद्यार्थियों में मेधा शक्ति के बावजूद आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण सुअवसर नहीं मिल पा रहे थे