Saturday, March 07 2026

पौष्टिकता से भरपूर उसना चावल,जानिए इसे तैयार करने के तरीक और फायदे

FIRSTLOOK BIHAR 03:37 AM बिहार

सौरभ शंकर पटेल ,

विषय वस्तु विशेषज्ञ (कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी), कृषि विज्ञान केंद्र सारण

प्राचीन काल से चावल का उपयोग मुख्य भोजन के रूप में किया जाता रहा है आज विश्व के आधे से अधिक जनसंख्या चावल को अपने आहार में मुख्य भोजन के रूप में खाती है माना जाता है कि अगर चावल न होता तो विश्व में बहुत से लोग भूख से मर जाते



मुख्य भोजन के साथ साथ यह पोषक तत्वों का भी प्रमुख स्रोत माना जाता है



धान को कूटने के पश्चात चावल बनता है धान को कूटने से उसके ऊपरी सतह में उपस्थित भूसा और चोकर चावल से अलग हो जाता है पारंपरिक लोग पहले उसना चावल खाते थे पर अब बढ़ती आबादी एवं व्यस्त जीवन शैली के कारण सफेद (अरवा) चावल खाने का चलन बढ़ गया है

अरवा चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती है काफी अधिक

दरअसल, सफेद चावल के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें कार्बाेहाइड्रेट की मात्रा काफी होती है, ऐसे में इसका नियमित सेवन करने और शारीरिक मेहनत न करने की वजह से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है लेकिन, सफेद चावल की इसी कमी को उसना चावल दूर कर देता हैै आज इस लेख में उसना चावल बनाने कि विधि, गुण एवं पोषक तत्व, की चर्चा करेंगे

अरवा चावल उसना चावल

उसना चावल बनाने (पारबॉयलिंग) की विधि

दरअसल, धान से चावल निकाला जाता है और इसकी प्रक्रिया अलग-अलग होती है जब धान से सीधे चावल निकाला जाता है तो वह अरवा या सफेद चावल कहलाता है लेकिन उसना चावल निकालने की विधि थोड़ी अलग होती है इसमें धान को पहले उबाला या कहें कि भाप में हल्का पकाया जाता है

फिर इसे धूप में सूखाया जाता है इस तरह धान फिर पहले की तरह सख्त हो जाता है. उसके बाद इससे चावल निकाला जाता है इस तरह धान से निकाले गए इस चावल का रंग हल्का पीला या भूरा हो जाता है चावल तैयार करने से पहले धान को उबालने की वजह से उसना चावल के गुण में काफी बदलाव हो जाते हैं उसना चावल बनाना एक जलतापीय उपचार है, जिसमें तीन चरण क्रमशः भिगोना, उबालना और सुखाना शामिल है यह प्रक्रिया चावल कि गुणवत्ता पर बहुत प्रभाव डालते हैं भारत में पारम्परिक उसना चावल बनाने की प्रक्रिया विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग तरीकों से की जाती है

उसना चावल तैयार करने के पारंपरिक तरीके

1. भिगोना

प्रक्रियाः धान (जो कि बिना छिलका हटाए हुए चावल होता है) को पानी में, आमतौर पर गुनगुने पानी में, कई घंटों तक भिगोया जाता है



उद्देश्यः इस चरण में चावल पानी सोखता है और इसके स्टार्च को अगले चरण के लिए तैयार करता है यह स्टार्च के जिलेटिनाइजेशन की प्रक्रिया को भी शुरू करता है

2. स्टीमिंग (भाप देना)

प्रक्रियाः भिगोने के बाद, चावल को उच्च तापमान पर भाप दी जाती है, जिसे दबाव में या सामान्य वायुमंडलीय परिस्थितियों में किया जा सकता है

प्रक्रियाः भाप की गर्मी से चावल का स्टार्च पूरी तरह से जिलेटिनाइज़ हो जाता है और सख्त हो जाता है, जिससे पोषक तत्व चावल के दाने में बंद हो जाते हैं और चावल की बनावट मजबूत हो जाती है यह चावल को पकाने पर कम चिपचिपा बनाता है

Related Post