Saturday, March 07 2026

भारतीय राष्ट्रवाद का दर्शन, स्वामी विवेकानंद, टैगोर,व गांधी के विचारों में झलकती है

FIRSTLOOK BIHAR 07:25 AM बिहार

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग व आईसीएचआर के संयुक्त तत्वावधान में परिसर स्थित सीनेट हाल में ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसके उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ संगीत कुमार रागी ने पश्चिम के उस सोच को नकार दिया जिसके अनुसार भारत कभी एक राष्ट्र था ही नहीं उन्होंने अपने तर्कों द्वारा स्पष्ट रूप से बताया कि किस तरह सयुंक्त राज्य अमेरिका ने अपने राष्ट्र निर्माण हेतु कैथोलिक धर्म का सहारा लिया और आज क्यों अपनी राष्ट्रीयता की रक्षा के लिए यूरोप के देश सारी सहिष्णुता को ताक पर रख दूसरे मुल्कों से आने वालों को प्रतिबंधित करने के लिए वीसा नियमों को कठोर बना रही है





राष्ट्रवाद की प्राचीनता का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद का दर्शन स्वामी विवेकानंद,टैगोर और गाँधी के विचारों में झलकती है!वेदों और उपनिषदों की ऋचाओं में उन्हें पाया जा सकता है! मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी के कुलपति डॉ संजय श्रीवास्तव ने ऐतिहासिक परिपेक्ष में भारतीय राष्ट्रवाद की प्राचीनता का उल्लेख किया





भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है हमारी संस्कृति हमारे विचारों की वाहक है, जो पूरी दुनिया को अपने विचारों से आच्छादित करती है हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है

भारत की संस्कृति विश्व को जोड़ने का काम करती है

विभागाध्यक्ष प्रो (डॉ ) नीलम कुमारी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत की संस्कृति, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को अग्रसर करने की ओर राह दिखाता है भारत की संस्कृति विश्व को जोड़ने का काम करती है विषय प्रवेश डॉ मधु सिंह ने कियामंच संचालन युवा शिक्षक डॉ अमर बहादुर शुक्ला ने किया

उक्त अवसर पर पिछले महीने सेवा निवृत हुए वरिष्ठ शिक्षक प्रो अनिल कुमार ओझा को कुलपति ने सम्मानित कियाकार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा प्रसिद्ध राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ प्रो जितेन्द्र नारायण, प्रो विकास नारायण उपाध्याय, प्रो अरुण कुमार सिंह,डॉ दिलीप कुमार, डॉ नित्यानंद शर्मा, डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह उपस्थित रहे

इस मौके पर विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी गण उपस्थित थे

उक्त अवसर पर विभाग की ओर से एक स्मारिका का प्रकाशन किया गया जिसमें 90 शोधार्थियों के द्वारा प्रस्तुति हेतु दिए गए पेपर को संग्रहित किया गया



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