Thursday, April 03 2025

भारतीय राष्ट्रवाद का दर्शन, स्वामी विवेकानंद, टैगोर,व गांधी के विचारों में झलकती है

FIRSTLOOK BIHAR 07:25 AM बिहार

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग व आईसीएचआर के संयुक्त तत्वावधान में परिसर स्थित सीनेट हाल में ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसके उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ संगीत कुमार रागी ने पश्चिम के उस सोच को नकार दिया जिसके अनुसार भारत कभी एक राष्ट्र था ही नहीं उन्होंने अपने तर्कों द्वारा स्पष्ट रूप से बताया कि किस तरह सयुंक्त राज्य अमेरिका ने अपने राष्ट्र निर्माण हेतु कैथोलिक धर्म का सहारा लिया और आज क्यों अपनी राष्ट्रीयता की रक्षा के लिए यूरोप के देश सारी सहिष्णुता को ताक पर रख दूसरे मुल्कों से आने वालों को प्रतिबंधित करने के लिए वीसा नियमों को कठोर बना रही है





राष्ट्रवाद की प्राचीनता का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद का दर्शन स्वामी विवेकानंद,टैगोर और गाँधी के विचारों में झलकती है!वेदों और उपनिषदों की ऋचाओं में उन्हें पाया जा सकता है! मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी के कुलपति डॉ संजय श्रीवास्तव ने ऐतिहासिक परिपेक्ष में भारतीय राष्ट्रवाद की प्राचीनता का उल्लेख किया





भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है हमारी संस्कृति हमारे विचारों की वाहक है, जो पूरी दुनिया को अपने विचारों से आच्छादित करती है हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है

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