Friday, March 06 2026

ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेन्ट, मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन

FIRSTLOOK BIHAR 02:30 AM बिहार

मुजफ्फरपुर : 24 एवं 25 जून 2025 को ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेन्ट मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गयामुख्य विषय भारत @ 2047 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रथम दिवस का उद्घाटन 24/06/2025 को भारत उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के कर कमलों से हुआ इस अवसर पर बिहार सरकार के उद्योग मंत्री, नीतीश मिश्रा, पंचायती राज मंत्री, केदार प्रसाद गुप्ता . कुलपति, बी.आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, प्रो. दिनेश चन्द्र राय एवं सभी शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मी छात्र एवं छात्राएँ कार्यक्रम में उपस्थित रहे



25 जून को सेमिनार के द्वितीय दिवस में लगभग 75 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये जो नई शिक्षा नीति के आमूलचूल परिवर्तन को स्वीकार करते हुए इसके लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करने हेतु संकल्पित रहे



सभी शोधार्थियों ने विषय वस्तु के साथ विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए इसके प्रभाव और परिणाम पर ध्यानाकर्षन किया भारतीय शिक्षण परंपरा के मूल रूप को समझ कर युवा पीढ़ी में ज्ञान और कौशल विकास के साथ-साथ मानवीय व्यवहार के गुणों के भी विकास होने पर जोर दिया

दूसरे दिन के प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए सत्र के नोट स्पीकर डा. अमर बहादुर शुक्ला. सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग, बी.आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सूक्ष्म तत्वों को अपने संभाषण में समाहित करते हुए कहा कि नीति की व्यापकता और जनमानस के विचारों से सूत्रपात्र होते हुए एक बहुआयामी रूप में उभर कर हमारे सामने आई है उन्होंने कहा कि यह नीति भाषा, संस्कार संस्कृति एवं धर्म को पुनर्जागृत करने में कामयाब होगी

इस सत्र की अध्यक्षता डा. राजेश्वर प्रसाद सिंह, उपनिदेशक, मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, बी.आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय ने की तथा अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमारे राष्ट्र के नई पीढ़ी को शिक्षा और शिक्षण व्यवस्था इस प्रकार से सुसज्जित करता है कि इसकी व्यापकता बौद्धिक विकास के साथ सृजनात्मकता को बढ़ावा मिले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से छात्र समसामयिका विषय वस्तु को ध्यान में रखकर संसाधनों को सुनियोजित करना सीख पायेंगे उन्होंने शोध पत्रों की गुणवत्ता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शोध पत्र की मौलिकता उत्कृष्ट होनी चाहिये

दूसरे दिन के द्वितीय सत्र के अध्यक्षीय संभाषण में की नोट स्पीकर डा. राशिद फारूखी, सहायक प्राध्यापक, मानू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद ने अपने विचार प्रस्तुत किये एवं कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा पद्धति को सकारात्मक रूप से युवाओं में परिवर्तन लायेगा क्योंकि यह विषयों सैद्धांतिक और कौशल विकास पर समान रूप से प्रोत्साहन देने की व्यवस्था कर रही है उन्होंने कहा कि समायिक परिस्थितियों में यह शिक्षा नीति समयानुकूल है, जो वर्तमान में छात्रों में सृजनशीलता, सूक्षम चिन्तन और सहयोग परक वातावरण का निर्माण करेगी



मुख्य वक्ता के तौर पर डा. उज्जवल आलोक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए कहा कि भाषागत, प्रबुद्धता, कौशल विकास और गुणात्मक सृजन हमारे नीति का उद्देश्य है परन्तु विभिन्न परिक्षेत्रों में पर्यवेक्षण के आधार पर आम राय निर्धारित करती है कि यह नीति तार्किक, कौशल विकास, सांस्कृतिक सुदृढता और बौद्धिक दक्षता को उत्कृष्टता प्रदान करेगी

ऑनलाइन मोड में डा. आशीष श्रीवास्तव, प्रोफेसर सह डीन, IUCTE-BHU ने अपने संभाषण में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पहुँच, समानता, गुणवत्ता, सामर्थ्य और वाबदेही पर जोर देती है इसका उद्देश्य समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से भारत की शिक्षा प्रणाली को बदलना है बहुविषयक और लचीली पाठ्यचर्या नीति एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है जो छात्रों को विभिन्न धाराओं से विषय चुनने की अनुमति देती है, जिससे व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव को बढ़ावा मिलता है उन्होंने बताया कि नई शिक्षा प्रणाली में शिक्षक गुणवत्ता बढ़ाने व कुछ छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने से रोकने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करके शिक्षा की अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है

कार्यक्रम के विदाई सत्र में डा. बी.एस. राय, कुलानुशासक एवं विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग बी.आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने अपने सम्बोधन में कहा कि हम भारतीय लोग आदर्श, संस्कार, संस्कृति एवं समाज के प्रति सदैव सतर्क रहते हुए समाज को गुणवत में सहयोग करते रहेंगे इसी प्रकरण में उन्होंने बताया कि गुरू शिष्य सम्बन्धों को सौहार्द छात्रों में उच्च गुणवत्ता, संस्कार एवं व्यावहारिक कौशल का विकास करते रहना होगा

इस अवसर पर महाविद्यालय के निदेशक, डॉ. मनीष कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम आनंद झा कुलसचिव डॉ. कुमार शरतेन्दु शेखर ने सभी छात्र-छात्राओं तथा महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों का आभार व्यक्त किया जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफल रहा

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