मुजफ्फरपुर : तलित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में पूर्व केन्द्रीय मंत्री व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं इस महाविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष स्व डाॅ जगन्नाथ मिश्र की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजली कार्यक्रम में उनकी आदमकद मूर्ति पर माल्यार्पण कर महाविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए श्रद्धांजली दी गई इस अवसर पर महाविद्यालय के निदेशक डॉ मनीष कुमार ने कहा कि स्व डाॅ जगन्नाथ मिश्र बिहार के गौरवमय सपूत और भारतीय राजनीति के प्रकाशवान नक्षत्र थे उन्हें अध्यात्म के सूक्ष्म स्वरुप में गहरी निष्ठा थी
उनकी वाणी एवं चिंतनधारा में मानवीय मूल्यों पर आधारित आध्यात्मिक परम्परा का आभास मिलता था
अपने मृदुल स्वभाव और मधुर वाणी द्वारा उन्होंने हिमालय से कन्याकुमारी तक विशाल भू-भाग में व्यापक मित्रमंडली बना ली थी स्वभाव में तो नम्रता थी पर कर्तव्य समक्ष होने पर उनके निर्णय बद्ध सदृश कठोर होते थे जिसका आभास उनके निकटतम व्यक्तियों को भी पहले नहीं हो पाता था लोकहित में कठोर से कठोर निर्णय लेने में उन्हें हिचक नहीं होती थी
महाविद्यालय के कुलसचिव डाॅ कुमार शरतेंदु शेखर ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्व डाॅ मिश्र जनसहयोग द्वारा योजनाओं के कार्य संपादन के हिमायती थे अपनी कल्पनाशीलता और पीड़ित मानव के दुखदर्द के प्रति संवेदनशील थे बिहार के पिछड़ापन के लिए उनके मन में आकुलता थी और सत्ता के उच्च शिखरों पर आसीन रहकर उन्होंने इसके निवारण के लिए भरसक प्रयत्न किए
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंधन संकाय के अध्यक्ष डा० श्याम आनंद झा ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्व डाॅ मिश्र ने प्राध्यापक के रुप में अपना करियर शुरु किया था और बाद में बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने डा० मिश्र तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहें उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में बचपन से ही थी
डा. मिश्र 1975 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने दूसरी बार उन्हें 1980 में कमान सौंपी गई और आखिरी बार 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे वे 1995-96 में अपनी राजनीतिक कुशलता के फलस्वरूप केन्द्रीय मंत्री भी बने थे सम्पूर्ण भारत विशेषकर बिहार में डा. मिश्र का नाम बड़े नेताओं के रूप में जाना जाता रहा