मुजफ्फरपुर : ‘नामवर सिंह, कृष्णा सोबती एवं श्रीलाल शुक्ल के शताब्दी स्मरण एवं दलित व अस्मिता विमर्श’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया प्रथम सत्र में स्वागत भाषण में प्राचार्या ममता रानी ने कहा शताब्दी वर्ष पर तीन बडे रचनाकारों को याद करना बदलते दौर का पुनर्मूल्यांकन करना है आलोचक नामवर सिंह ने यथार्थ और जीवंत आलोचना कर के ईन रचनाकारों को महान बनाया है
कृष्णा सोबती संवेदनशील कथाकार के साथ स्त्री चेतना को बेहतर समझ रखने वाली रचनाकार हैं
नामवर सिंह जो अपार हर्षोंल्लास का विषय है
उद्घाटन भाषण करते हुए रविभूषण ने कहा कि नामवर सिंह एक गंभीर चिंतक एवं आलोचक थे जो आज होना असंभव सा लगता है पूरब से पशिचम, उत्तर से दक्षिण दिशा तक उनकी झलक दिखाई देती है उनकी आलोचना दृष्टि अतिसंवेदनशील रही है आलोचना के विविध पहलुओं को उजागर करने का जोखिम नामवर सिंह उठाते हैं वक्ता के रूप में पूनम सिन्हा ने कहा एक शिखर पुरुष के रुप में नामवर सिंह ही हैंइसका मूल कारण है नव्यता उनके कथन में सरलता एवं पुर्ननवा सी दृष्टि है ,जो साहित्य को अनुसंधान की दृष्टि से देखने में सक्षम थेजे.एन.यू. के विद्वान प्रो. देव शंकर नवीन मुक्तिबोध के जीवन संघर्ष की भांति नामवर सिंह का भी संघर्ष सागर में दंतकथाएं सी हैं जिसमें नामवर जी को लांघा जाता है नामवर सिंह ने कथालोचना को नयी जमीन प्रदान की है
तरुण कुमार ने कहा कि नामवर सिंह ऐसे गुरु थे जिन्होने अंदर के ज्ञान को बाहर निकालें नामवर सिंह हिंदी के स्वाभिमान के प्रतीक थेइसी बीच हिंदी विभाग का दूसरा अंंक संगत , अभिधा पत्रिका का एवं किताब (नचिकेता को संदर्भित पुस्तक ) का लोर्कापण किया गयाकार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. सतीश राय ने कहा कि नामवर जी बाद में व्यक्ति थे ,पहले वे एक सफल आलोचक थेजिन्होंने आलोचना के फलक को व्यापक किया
कार्यक्रम में मंच संचालन हिंदीविभागाध्यक्ष चित्तरंजन कुमार ने कियाधन्यवाद ज्ञापन संदीप कुमार सिंह ने कियाद्वितीय सत्र का विषय शताब्दी स्मरण कृष्णा सोबती और श्रीलाल शुक्ल स्मरण रहा
राकेश रेणु जी ने कहा कृष्णा सोबती की लेखनी मील का पत्थर हैजिसने विभाजन और स्त्री विमर्श को नवीन आयाम प्रदान किया जिसकी रचनाएं महिलाओं की स्थिति से रुबरु कराती हैं और सत्य को जमीं पर लाने का काम करती हैं विदुषी वक्ता सुनीता गुप्ता ने कहा हिंदी जगत की अप्रतिम ,विशिष्ट कथाकार थीजो प्रत्येक स्त्री के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है ,वह एक अलग लकीर खींचती है