14 दिनों का घर-घर अभियान और स्कूलों में विशेष बूथ अभियान की रणनीति को साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि आगामी 11 फरवरी को जिले के सभी 3,174 आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप का आयोजन किया जाएगा
इन केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों की सीधी देखरेख में आम जन को दवा का सेवन कराया जाएगा इसके साथ ही अगले 14 दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर दस्तक देंगी ताकि कोई भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रहे अभियान के अंतिम तीन दिनों में जिले के 1,784 स्कूलों में विशेष बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहाँ छात्र-छात्राओं को उनकी निगरानी में दवा खिलाई जाएगी
प्रशिक्षण और निगरानी के लिए पुख्ता इंतजाम:
इस व्यापक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जमीनी स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं जिला स्तर पर स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को पहले ही विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके दवा खिलाने के लिए कुल 1,672 दल बनाए गए हैं, जिसमें 3,344 दवा प्रशासकों की नियुक्ति की गई है पूरे कार्य की मॉनिटरिंग के लिए 166 पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है
स्वस्थ दिखने वाले व्यक्तियों के लिए भी दवा अनिवार्य:
कार्यशाला में डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया के लक्षण संक्रमण के कई वर्षों बाद उभरते हैं, इसलिए स्वस्थ दिखने वाले व्यक्तियों को भी यह दवा लेना अनिवार्य है यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में छिपे संक्रमण को शुरुआती दौर में ही नष्ट करना है
हालांकि, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है इस मौके पर पिरामल के डीएम प्रभाकर कुमार, पी एल रोहित कुमार, सीएफएआर प्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे