Saturday, March 07 2026

संघ शताब्दी वर्ष पर प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन 11 से 14 फरवरी तक

FIRSTLOOK BIHAR 11:52 AM बिहार

मुजफ्फरपुर: संघ शताब्दी वर्ष 2026 के अवसर पर आयोजित होने वाले प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन को लेकर भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, मुजफ्फरपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गयाप्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने संघ शताब्दी वर्ष के महत्व और सम्मेलन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक, स्थायी और मूल्यपरक परिवर्तन लाना है



रामलाल सिंह ने विद्या भारती द्वारा प्रकाशित पुस्तक “पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए सभी प्रेस प्रतिनिधियों को यह पुस्तक भेंट की



उन्होंने पुस्तक में वर्णित पाँच परिवर्तन 1. सामाजिक समरसता, 2. पारिवारिक प्रबोधन, 3. स्वदेशी, 4. पर्यावरण संरक्षण, 5. नागरिक कर्तव्य पर विस्तार से जानकारी दी उन्होंने कहा कि ये पाँच परिवर्तन केवल विचार नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार में उतारने योग्य जीवन मूल्य हैं शिक्षा जगत, विशेषकर प्रधानाचार्य एवं शिक्षक वर्ग, इन मूल्यों को विद्यालयों के माध्यम से समाज तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं अपने संबोधन में रामलाल सिंह ने भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ वास्तविक अर्थों में शिक्षक निर्माण का कार्य होता है उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय की कक्षाओं में सुदृढ़ शैक्षणिक परंपरा है और यहाँ भावी शिक्षकों को व्यवहारिक, वैचारिक एवं नैतिक रूप से तैयार किया जाता है उन्होंने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली शिक्षा और संस्कार के साथ-साथ गुणवत्ता-आधारित (Quality Based) शिक्षा पर भी विशेष बल देती है, जिससे समाज को सक्षम और जागरूक शिक्षक प्राप्त होते हैं श्री सिंह ने आगे कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोल रही हैं यदि AI का उपयोग भारतीय मूल्यों के अनुरूप किया जाए, तो यह शिक्षा को अधिक प्रभावी बना सकता है उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि यदि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए, तो बालक के मस्तिष्क का विकास अधिक स्वाभाविक और गहन होता है

मातृभाषा में शिक्षा से बालक की समझ, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा को रोजगार एवं कौशल विकास (Skill Development) से जोड़ना आज की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थी आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें इसके पश्चात मीडिया प्रमुख डॉ. सौरभ ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि यह प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन दिनांक 11 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा यह आयोजन फाल्गुन कृष्ण पक्ष नवमी से फाल्गुन कृष्ण द्वादशी तक चलेगा, जिसमें प्रदेश भर से लगभग ढाई सौ प्रधानाचार्य भाग लेंगे वहीं महाविद्यालय के सचिव डॉ. ललित किशोर ने कहा कि भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय को यह गौरव प्राप्त हुआ है कि वह संघ शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसर पर इस प्रांतीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है उन्होंने बताया कि चार दिवसीय इस सम्मेलन में उद्घाटन सत्र, वैचारिक सत्र, संवाद सत्र, कार्यशालाएँ एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे प्रेस वार्ता में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल , विभाग निरीक्षक राजेश रंजन, तथा विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं पूर्णकालिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे अंत में मीडिया प्रमुख डॉ. सौरभ ने सभी मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया

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