Saturday, March 07 2026

मुजफ्फरपुर में एईएस/जेई रोकथाम को लेकर अलर्ट मोड में प्रशासन, राज्य स्वास्थ्य समिति के ईडी ने की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा

FIRSTLOOK BIHAR 05:18 AM बिहार

एईएस नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य विभाग की रणनीति! प्रशिक्षण, दवा भंडारण और जागरूकता अभियान पर विशेष जोर

शून्य मृत्यु दर लक्ष्य के साथ जिला प्रशासन सक्रिय, संध्या चौपाल और घर-घर अभियान से बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
मुजफ्फरपुर : जिले में एईएस/जेई (चमकी बुखार) की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रोटोकॉल के अनुरूप संपूर्ण गतिविधियां शुरू कर दी है इसी क्रम में शुक्रवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने जिले में एईएस की समग्र तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा जिला पदाधिकारी की उपस्थिति में की समीक्षा बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अब तक की गई तैयारी संबंधी सभी गतिविधियों, संसाधनों की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई





बैठक में अवगत कराया गया कि एईएस की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में कार्य कर रहे हैं



जिला एवं प्रखंड स्तर से लेकर पंचायत तक जागरूकता अभियान की रूपरेखा , विभागों की सहभागिता, दवा की उपलब्धता तथा डाक्टर स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति एवं उसकी मॉनिटरिंग प्रणाली के बारे में अवगत कराया गया विशेष रूप से संध्या चौपाल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को एईएस के लक्षण, बचाव एवं त्वरित उपचार के संबंध में जागरूक एवं प्रेरित करने की तैयारी से अवगत कराया गया प्रत्येक सप्ताह शनिवार को पंचायतों में संध्या चौपाल का आयोजन कर अभिभावकों को बच्चों के खान-पान, स्वच्छता और समय पर इलाज के महत्व के बारे में जानकारी देने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया

प्रशिक्षण और क्षमता संवर्द्धन

समीक्षा के दौरान बताया गया कि एईएस से निपटने के लिए जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों, चिकित्सा पदाधिकारियों, आईसीडीएस वर्कर्स , एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का चरणबद्ध प्रशिक्षण देने की तैयारी है प्रशिक्षण कार्यक्रम में एईएस की पहचान, प्राथमिक उपचार, रेफरल व्यवस्था, दवा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया

स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत डॉक्टरों एवं कर्मियों को बच्चों में एईएस के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर तत्काल उपचार प्रारंभ करने के लिए प्रशिक्षित करने की व्यवस्था है साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी संदिग्ध मरीज को बिना विलंब उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए

दवा एवं संसाधनों की उपलब्धता

बैठक में दवा, उपकरण एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई जिला स्तर पर आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पताल में ग्लूकोज, एंटीबायोटिक, एंटीपायरेटिक, ऑक्सीजन एवं अन्य आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है अस्पतालों में बेड, आईसीयू सुविधा, ऑक्सीजन सप्लाई एवं एम्बुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए कार्यपालक निदेशक ने कहा कि मरीजों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए

डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की निगरानी

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की प्रतिदिन मॉनिटरिंग दर्पण एप के माध्यम से सुनिश्चित की जाए इससे सेवा में पारदर्शिता आएगी तथा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सकेगा उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी सभी संबंधित पदाधिकारी और कर्मी एलर्ट एवं एक्टिव मोड में रहकर कार्य करें

विभागीय समन्वय पर विशेष जोर

एईएस की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न विभागों की सहभागिता आवश्यक है

बैठक में जीविका, आईसीडीएस, शिक्षा, पंचायत राज, नगर निकाय एवं अन्य विभागों की भूमिका पर भी चर्चा की गई जीविका दीदियों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता संदेश पहुंचाने की प्लानिंग है आईसीडीएस सेविकाओं एवं सहायिकाओं को बच्चों के पोषण स्तर पर विशेष निगरानी रखने तथा कुपोषित बच्चों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने का निर्देश दिया गया है शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में बच्चों को चेतना सत्र में एईएस के संबंध में जानकारी देने का निर्देश दिया गया पंचायत प्रतिनिधियों को भी जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने तथा अपेक्षित सहयोग देने का अनुरोध किया गया है

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