Thursday, March 12 2026

तिरहुत प्रमंडल में बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित

FIRSTLOOK BIHAR 02:02 AM बिहार

मुजफ्फरपुर : तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया

कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने की



इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की





यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है

उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है

प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई



इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है

कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है

कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया

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