मुजफ्फरपुर : बिहार में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आज एनीमिया(खून कि कमी) के खिलाफ विशेष अभियान की शुरुआत की राज्य के माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से Ferric Carboxymaltose Injection (FCM) थेरेपी अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया यह पहल राज्य में एनीमिया की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक ठोस कदम मानी जा रही है
मुजफ्फरपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम
राज्यस्तरीय शुभारंभ के साथ मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया
कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार एवं श्री रेहान अशरफ जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने किया इस अवसर पर अधीक्षक डॉ ज्ञानेन्दु शेखर, डॉ. प्रेरणा सिंह, प्रवीण कुमार स्वास्थ्य प्रबंधन राज किरण कुमार डी.डी.ए. आशा, पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि ऋतु सिंह, नसीरुल होदा, श्वेता, राजीव एवं अंकित समेत स्वास्थ्य विभाग के प्रखंड से कुल 57 एनेमिक लाभार्थी में से 28 लाभार्थी भैकसिनेशन हेतु योग्य पायी गई लाभार्थी मोबिइलाईजेशन में प्रखंड के प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक का बहुत सहयोग रहा कर्मी उपस्थित रहे
सिविल सर्जन ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार बिहार में लगभग 63 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 63.9 प्रतिशत तक पहुंच जाता है यह राष्ट्रीय औसत 52 प्रतिशत से काफी अधिक है और राज्य के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है
अभियान के लिए विशेष व्यवस्थाएँ
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई अहम व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं
इसके साथ ही चिन्हित एनीमिक गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने और उपचार के बाद सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था भी की गई है अभियान के संचालन के लिए प्रशिक्षित चिकित्सा पदाधिकारियों और स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है तथा राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की सूची भी जारी की गई है
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सभी जिला अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया गया
उपचार प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश
• स्वास्थ्य विभाग ने FCM थेरेपी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं मध्यम एनीमिया (Hb 7–9.9 g/dl) की स्थिति में 34 सप्ताह से अधिक गर्भावस्था होने पर FCM थेरेपी को प्राथमिक उपचार के रूप में दिया जाएगा, जबकि 34 सप्ताह से कम होने पर ओरल आयरन असफल होने पर इसका उपयोग किया जाएगा
• गंभीर एनीमिया (Hb 5–6.9 g/dl) से पीड़ित 13 से 34 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं के लिए IV आयरन (FCM) को प्राथमिक उपचार के रूप में अपनाया जाएगा प्रसव के बाद 42 दिनों तक यदि हीमोग्लोबिन 5 से 9.9 g/dl के बीच रहता है, तो चिकित्सक की सलाह पर यह थेरेपी दी जा सकती है
• डोज की गणना Ganzoni Formula के आधार पर की जाएगी, जिससे प्रत्येक महिला को आवश्यकतानुसार सटीक आयरन मात्रा मिल सके इंजेक्शन देने के दौरान और उसके बाद कम से कम 30 मिनट तक मरीज की निगरानी अनिवार्य की गई है किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जीवन रक्षक दवाएं—जैसे एविल और हाइड्रोकार्टिसोन—उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर प्रसव पूर्व जांच में चिन्हित विभिन्न प्रखंडों की 17 एनीमिक गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस के माध्यम से सदर अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें FCM थेरेपी दी गई तथा उपचार उपरांत पुनः एंबुलेंस से उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाया गया
मातृ स्वास्थ्य सुधार की दिशा में अहम कदम
यह अभियान मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और एनीमिया मुक्त बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि FCM थेरेपी के प्रभावी क्रियान्वयन से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होगा और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलेगा