Thursday, April 23 2026

रेणु जी की अनूठी रचना-दृष्टि व आंचलिक सरोकार उनकी समाजवादी विचार-दृष्टि का ही प्रतिफलन है.. : प्रो.प्रमोद कुमार सिंह

FIRSTLOOK BIHAR 17:38 PM बिहार

मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोतर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की पुण्य-तिथि पर हिन्दी साहित्य में आंचलिकता: विशेष संदर्भ रेणु विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि-सह-वक्ता के तौर पर बोलते हुए उक्त बातें विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं विद्वान व लोकप्रिय प्राध्यापक प्रो.प्रमोद कुमार सिंह ने कही प्रो.प्रमोद कुमार सिंह ने अपने मुख्य वक्तव्य में आंचलिकता को स्थानीयता या क्षेत्रीयता के रूप में रेखांकित किया उन्होंने पूरे विश्व साहित्य व संस्कृत व अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का हवाला देते हुए विस्तार से बताया कि साहित्य में आंचलिकता या स्थानीयता कोई नयी चीज नहीं



रचनाकार जिस क्षेत्र-विशेष से सम्बद्ध होता है, उसके साहित्य में उस क्षेत्र-विशेष की समस्या एवं उसकी भाषा, बोली, मुहावरे, सोच व भंगिमा आ ही जाती है



रेणु के साहित्य में यह इसलिए विशेष तौर पर आया कि वे अपने उस क्षेत्र-विशेष से गहरे तौर पर जुड़े थे और उनकी दृष्टि समाजवादी विचारधारा से लैस थी अपने वक्तव्य की कड़ी में उन्होंने यह भी कहा कि यह गौरतलब है कि रामदयालु सिंह महाविद्यालय भी धर्म-जाति के तौर पर एक सेक्यूलर व समाजवादी विचारधारा से लैस विशिष्ट व्यक्तित्वों से अनुप्राणित महाविद्यालय रहा है इस महाविद्यालय में समाजवादी लेखक रेणु को याद करना एक रेखांकित करनेवाला कार्य है

संगोष्ठी का आरंभ दीप-प्रज्जवलन द्वारा हुआ दीप-प्रज्जवलन के पश्चात मुख्य अतिथि प्रो.प्रमोद कुमार सिंह व प्राचार्य प्रो.शशिभूषण कुमार सहित महाविद्यालय के वरीय प्राध्यापक प्रो.नीलिमा झा, प्रो.संजय कुमार सुमन व प्रो.रवीन्द्रनाथ ओझा का स्वागत अध्यक्ष प्रो.रमेश प्रसाद गुप्ता सहित विभागीय सदस्यों द्वारा अंगवस्त्र व पौधा देकर किया गया संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो.शशिभूषण कुमार व संचालन डॉ.आशिष कुमारी कान्ता ने किया तथा आगत अतिथियों का स्वागत विभागीय सदस्य डॉ.मनोज कुमार सिंह ने किया वही विभागीय सदस्य डॉ.नीरज कुमार मिश्र ने संगोष्ठी का विषय-प्रवेश कराने के क्रम में आंचलिक लेखन को परिभाषित करते हुए सम्बद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन एवं उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर संक्षेप में प्रकाश डाला जबकि विषय-विस्तार करने के क्रम में प्रतिष्ठित लेखक व विभागाध्यक्ष प्रो.रमेश प्रसाद गुप्ता ने फणीश्वरनाथ रेणु के लेखन के अनूठे वैशिष्ट्य व अवदान को रेखांकित करते हुए उनके लेखन को अपने समय का एक प्रामाणिक समाज-ऐतिहासिक दस्तावेज कहा अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्राचार्य प्रो.शशिभूषण कुमार ने प्रो.प्रमोद कुमार के अगाध ज्ञान व विद्वता की चर्चा करते हुए युवा पीढ़ी को उनसे प्रेरणा ग्रहण करने और जीवन में समर्थ-सफल होने के लिए हमेशा ज्ञानोत्सुक व ज्ञान-पिपासु बनने को कहा

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हमेशा होते रहने चाहिए, ताकि छात्र ज्ञान के प्रति अनुप्राणित हो सकें संगोष्ठी के अंत में धन्यवाद-ज्ञापन सुश्री दिव्या ने किया

संगोष्ठी में महाविद्यालय के कला, वाणिज्य व विज्ञान संकाय के विभिन्न विभागों से डॉ.सौरभ राज, डॉ.रजनीकांत पाण्डेय, डॉ.अनुराधा पाठक, डॉ.अजमत अली, डॉ.ललित किशोर, डॉ.श्रुति मिश्रा, डॉ.आयेशा जमाल, डॉ.सुमन लता, डॉ.प्रियंका दीक्षित, डॉ.नियाज अहमद, डॉ.कृतिका वर्मा, डॉ.हसन रजा, डॉ.आशुतोष मिश्र, डॉ.आलोक त्रिपाठी, डॉ.भगवान साह, डॉ.स्नेहलता, डॉ.पूजा लोहान, डॉ.आरती कुमारी, डॉ.अमर रंजन ज्योति, डॉ.आमोद कुमार, डॉ.विनोद कुमार, डॉ.संध्या, डॉ.सी.के.झा, डॉ.त्रिपाठी, डॉ.बिन्दु, डॉ.भैरवी, डॉ.आरती मित्रा, डॉ.अपर्णा, डॉ.रवीन्द्र सहित काफी संख्या में प्राध्यापक-प्राध्यापिकाऍं एवं छात्र-छात्राऍं उपस्थित रहीं

Related Post