उनका मानना था कि न्याय की अवधारणा अधिकारों पर आधारित होती है और किसी देश का संविधान अधिकारों को संरक्षण प्रदान करता है
उन्होंने बताया कि अमेरिका की यूनिवर्सिटी से लेकर यूरोप के शोध केदों तक उनके विचारों और कार्यों पर सबसे अधिक शोध हो रहा है बिहार के विश्वविद्यालयों में भी अंबेडकर के कार्यों पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है
अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय ने कहा कि अंबेडकर ने न्याय को केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक समावेशी सामाजिक व्यवस्था के रूप में देखा और इसे भारतीय संविधान के माध्यम से क्रियान्वित किया गया अंबेडकर ने न्याय को केंद्र में रखकर समतामूलक, मानवतावादी और संवैधानिक समाज पर जोड़ दिया उनकी दृष्टि में न्याय का अर्थ दलितों, महिलाओं और श्रमिकों को समान अधिकार व अवसर देना था विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्रों को अंबेडकर के विचार को अपनाते हुए इस जन-जन तक पहुंचाने का दायित्व निभाना चाहिए
कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए छात्र कल्याण पदाधिकारी डॉ आलोक प्रताप सिंह ने अंबेडकर के न्यायिक विचारों के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला
पुस्तक लोकार्पण: कार्यक्रम में डॉ सुकन पासवान प्रज्ञा चक्षु द्वारा लिखित किताब बुद्ध एवं अंबेडकर का लोकार्पण हुआ डॉ सुकन पासवान ने अंबेडकर और बुद्ध के दर्शन पर भी प्रकाश डाला
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत से हुआ इसके बाद कवि राम उचित पासवान ने स्वरचित अंबेडकर गीत को गाकर अंबेडकर की महिमा पर प्रकाश डाला
कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत कुलसचिव डॉ समीर कुमार शर्मा ने किया मंच संचालन पूर्व उप कुलसचिव श्री उमाशंकर दास ने किया और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ विनोद बैठा ने किया
मौके पर प्रॉक्टर डॉ आर के चौधरी, प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार, सिंडिकेट सदस्य डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, सीनेट सदस्य डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ रजनीश कुमार गुप्ता, डॉ वीरेंद्र कुमार, डॉ अमर बहादुर शुक्ला, डॉ अमानुल्ला, डॉ सुशांत कुमार, डॉ विपिन कुमार राय, डॉ ललित किशोर, डॉ सतीश कुमार, श्री उमा पासवान, डॉ मुन्ना सिंह यादव, श्री अमिताभ कुमार, डॉ विजय कुमार, डॉ वीरेंद्र चौधरी, डॉ अनुपम, डॉ अनिल धवन, गौरव कुमार समेत कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता गण उपस्थित थे