रामदयालु सिंह महाविद्यालय के इतिहास विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग, आइक्यूएसी, और एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्वावधान में कृष्ण सभा भवन में सोशल इंक्लूजन इन द विज़न ऑफ़ डॉ बीआर अंबेडकर विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि डॉ अंबेडकर का व्यक्तित्व ग्लोबल और बहु आयामी था उन्हें ज्ञान का प्रतीक, सामाजिक क्रांतिकारी, आधुनिक भारत के निर्माता और शोषितों के मसीहा के रूप में विश्व भर में जाना जाता है डॉ आंबेडकर उस दौर के सबसे शिक्षित भारतीय नेतृत्वकर्ता में से एक थे
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र, कानून और राजनीति विज्ञान में उच्च डिग्री प्राप्त की
यह उनके ग्लोबल बौद्धिक दृष्टिकोण को दर्शाता है बाबा साहेब के शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो का संदेश और समतावादी विचार विश्व के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है हम शिक्षक एवं छात्रों को उनके विचारों से सीख लेने की जरूरत है
इतिहासकार व सीनेट सदस्य डॉ संजय कुमार सुमन ने कहा कि डॉ अंबेडकर का समता मूलक विचार जाति, लिंग और वर्ग भेद से मुक्त एक न्यायपूर्ण समाज पर आधारित था यह विचार स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों का समर्थन करता है निश्चित रूप से अंबेडकर के विचार भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन है
डॉ आर एन ओझा ने कहा कि अंबेडकर एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री थे, जिनके विचार कृषि, मुद्रा, श्रम और समावेशी विकास पर आधारित थे
सिंडिकेट सदस्य डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि अंबेडकर का मानवतावाद केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक था जो समाज को तर्कसंगत और न्यायपूर्ण बनाने का आह्वान करता है
कार्यक्रम में डॉ नीलिमा झा, डॉ एम हुसैन, डॉ एमएन रजवी, डॉ अजमत अली, डॉ ललित किशोर, डॉ अमर ज्योति आदि ने अंबेडकर के विचारों के सामाजिक संदर्भ को प्रस्तुत किया
मंच संचालन डॉ पंकज कुमार तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ रजनीकांत पांडे ने किया
मौके पर डॉ सौरभ राज, डॉ हसन रजा, डॉ भगवान कुमार, डॉ आलोक त्रिपाठी, डॉ अनुराधा पाठक, डॉ स्नेहलता, डॉ प्रियंका दिक्षित, डॉ कृतिका वर्मा, डॉ सुमन लता, डॉ अमिता त्रिवेदी, डॉ आशीष कुमारी कांता, डॉ रविंद्र कुमार, कुमारी निधि समेत सभी विभागों के छात्र-छात्राएं मौजूद थे