मुजफ्फरपुर : भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया का मुजफ्फरपुर जिले में औपचारिक शुभारंभ हुआ इस अवसर पर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने स्वयं अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी कर नागरिकों के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया जिले में आज पहले ही दिन 1143 व्यक्तियों द्वारा स्व-गणना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई है, जो इस अभियान के प्रति नागरिकों की जागरूकता और उत्साह को दर्शाता है
यह संख्या आने वाले दिनों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है
सरकार द्वारा निर्धारित शेड्यूल के अनुसार प्रखंड स्तर पर कर्मियों का प्रशिक्षण लगातार जारी है जिलाधिकारी ने इस अभियान से जुड़े सभी कर्मियों को तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत और सूक्ष्म जानकारी प्रदान करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर त्रुटि या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि जनगणना देश की विकास योजनाओं का आधार होता है
भारत की जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में से एक है देश में पहली बार 1872 में जनगणना की शुरुआत हुई थी, जबकि 1881 से इसे नियमित रूप से हर 10 वर्ष के अंतराल पर आयोजित किया जाने लगा स्वतंत्र भारत में पहली जनगणना 1951 में हुई थी और तब से यह प्रक्रिया निरंतर जारी है वर्ष 2021 में वैश्विक कोरोना महामारी के कारण जनगणना कार्य बाधित हुआ था, जिसे अब 2027 में पुनः प्रारंभ किया जा रहा है
इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जा रही है, जो इसे आधुनिक और पारदर्शी बनाती है यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी
प्रथम चरण में 2 मई से 31 मई 2026 तक मकान गणना का कार्य किया जाएगा, जबकि द्वितीय चरण में फरवरी 2027 से जनसंख्या गणना शुरू होगी विशेष बात यह है कि इस बार नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए स्व-गणना का विकल्प दिया गया है, जो 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगा
स्व-गणना की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए मोबाइल आधारित व्यवस्था विकसित की गई है नागरिक अपने मोबाइल ब्राउज़र में Census 2027 सर्च कर आधिकारिक लिंक के माध्यम से पोर्टल खोल सकते हैं इसके बाद राज्य का चयन, कैप्चा सत्यापन, परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद OTP के माध्यम से लॉगिन किया जाता है फिर 34 प्रश्नों के उत्तर भरकर फॉर्म सबमिट करना होता है, जिसके बाद एक यूनिक SE ID प्राप्त होती है यह ID भविष्य में सत्यापन के दौरान प्रगणक को दिखानी होगी
जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही परिवार की स्व-गणना संभव होगी, इसलिए नागरिकों को सावधानीपूर्वक जानकारी दर्ज करनी चाहिए
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को तकनीकी कठिनाई होती है, तो स्थानीय प्रशासन और प्रखंड स्तर पर सहायता ली जा सकती है
स्व-गणना का महत्व
एवं उपयोगिता
जिलाधिकारी ने स्व-गणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह न केवल नागरिकों को सशक्त बनाता है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाता है स्व-गणना के माध्यम से नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करते हैं, जिससे डेटा की शुद्धता बढ़ती है और गलतियों की संभावना कम हो जाती है
उन्होंने बताया कि जनगणना के आंकड़े सरकार की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की योजना इन्हीं आंकड़ों के आधार पर बनाई जाती है