मुजफ्फरपुर : जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन निर्देश संस्था ने अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया इस अक्षय तृतीया पर निर्देश संस्था के द्वारा शहर के प्रसिद्ध मंदिर बाबा गरीब नाथ धाम, संतोषी माता मंदिर, बाबा मुक्ति नाथ मंदिर एवं अन्य मंदिरों पर लोगो के बीच जागरुकता कार्यक्रम किया गया जिसमें मंदिर के धर्म गुरु/पुजारी एवं अन्य लोगों के द्वारा संकल्प लिया गया कि हम लोग एक भी बाल विवाह में शामिल नहीं होंगे
और हम सब के सामूहिक प्रयास से ही 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनेगा
इस अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) व पंचायत जनप्रतिनिधि, धर्म गुरु, आशा यूनिटों , आंगनवाड़ी, विद्यालय शिक्षक, समुदाय के महिला-पुरुष, किशोर किशोरियों,ने भी सहयोग दिया और जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प दोहराया निर्देश संस्था जिला प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है और जिले में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है निर्देश संस्था देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है
जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए निर्देश संस्था के कार्यक्रम निदेशक बिनोद कुमार जी ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है
उन्होंने कहा कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है
लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है यह एक उल्लेखनीय बदलाव है और हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन 250 से भी ज्यादा सहयोगियों के साथ बाल विवाह की ऊंची दर वाले देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में इस अपराध के खिलाफ अभियान चला रहा है इस नेटवर्क ने अब तक पांच लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं आज के कार्यक्रम में निर्देश संस्था के टीम लीडर पिंकी देवी , कानूनी सलाहकार अमोद कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मुकुल कुमार, अंजु कुमारी, देवेंद्र पंडित, संतोष कुमार उपास्थित हुए !