Saturday, April 25 2026

सिर्फ हुंकार नहीं, चिंतन की धरोहर हैं राष्ट्रकवि दिनकर: प्रो.कनुप्रिया

FIRSTLOOK BIHAR 12:19 PM बिहार

मुजफ्फरपुर : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को लंगट सिंह कॉलेज में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया महाविद्यालय स्थित दिनकर पार्क में आयोजित माल्यार्पण कार्यक्रम में शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए इस अवसर पर सभी ने याद किया कि दिनकर जी केवल राष्ट्रकवि ही नहीं, बल्कि इसी महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा भी रहे हैं



श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया ने दिनकर के साहित्य और व्यक्तित्व पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया



उन्होंने कहा, अक्सर जब दिनकर का नाम आता है, तो हमारे कानों में कुरुक्षेत्र का गर्जन या रश्मिरथी का ओज गूंजने लगता है लेकिन दिनकर जी को केवल आग का कवि कहना उनके विराट व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं होगा दिनकर जितने समर्थ हुंकार भरने में थे, उतने ही गहरे वे चिंतन करने में भी थे प्रो.कनुप्रिया ने उनके वैचारिक संघर्ष पर जोर देते हुए कहा, दिनकर की सबसे बड़ी विशेषता उनका आंतरिक द्वंद्व था राष्ट्रकवि व्यवस्था के भीतर रहकर भी व्यवस्था को आईना दिखाने का साहस रखते थे लंगट सिंह कॉलेज से उनके लगाव पर चर्चा करते हुए कनुप्रिया ने कहा, दिनकर जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि युगदृष्टा थे उन्होंने इसी परिसर में शिक्षक रहते हुए समाज को जगाने वाली कालजयी रचनाएँ लिखीं सच तो यह है कि लंगट सिंह कॉलेज का कण-कण उनकी स्मृतियों से ओतप्रोत है हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव झा ने कहा कि इसी महाविद्यालय के हिंदी विभाग से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें राष्ट्रकवि के शिखर तक ले गया

मौके पर प्रो. एसआर चतुर्वेदी, डॉ ऋतुराज कुमार, डॉ अर्धेंदु, डॉ वेदप्रकाश दुबे, डॉ राजीव कुमार, डॉ शशिकांत पाण्डेय, डॉ स्वीटी सुप्रिया, डॉ आनंद कुमार सिंह सहित अन्य मौजूद रहे

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