Thursday, July 09 2026

विद्या भारती के क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग का मुजफ्फरपुर में शुभारंभ

FIRSTLOOK BIHAR 17:18 PM बिहार

शिक्षक केवल विषय का ज्ञाता नहीं, बल्कि राष्ट्र का विधाता है

मुजफ्फरपुर : भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा, चरित्र निर्माण तथा आधुनिक शिक्षण कौशल के समन्वय को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ गुरुवार को सदातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर में हुआ यह प्रशिक्षण वर्ग 09 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है

इस सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में आदित्य प्रकाश जालान टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची, पूरनमल बाजोरिया टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, भागलपुर तथा भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर के आचार्य एवं संकाय सदस्य सहभागिता कर रहे हैं



उद्घाटन सत्र का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण में हुआ





कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का परिचय डॉ. ललित किशोर (सह सचिव, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान) ने कराया उन्होंने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर अभिनंदन किया

प्रशिक्षण वर्ग की विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए प्रो. रजनीश कुमार गुप्ता (अध्यक्ष, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान) ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक को केवल अध्यापन तक सीमित न रहकर अनुसंधान, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक के रूप में कार्य करना होगा उन्होंने आचार्यों से शोधपरक एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय, कुलपति, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञाता नहीं, बल्कि राष्ट्र का विधाता है उन्होंने भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति केह मूल्यों को व्यवहार में उतारते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर बल दिया तथा विश्वविद्यालय में चल रहे शैक्षणिक नवाचारों की भी जानकारी दी

विशिष्ट अतिथि प्रकाश चंद्र (उपाध्यक्ष, विद्या भारती अखिल भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान) ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को संकीर्णता से मुक्त कर उसके समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है उन्होंने भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को समय की आवश्यकता बताया

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. रमण त्रिवेदी (क्षेत्रीय संयोजक, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, उत्तर-पूर्व क्षेत्र) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में आचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से राष्ट्र निर्माण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने सा विद्या या विमुक्तये के आदर्श को शिक्षा का मूल मंत्र बताते हुए तक्षशिला एवं नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों की गौरवशाली परंपरा का स्मरण किया राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीयता, पंचकोशीय शिक्षा, चरित्र निर्माण तथा विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विशेष बल दिया गया

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमर लबहादुर शुक्ल (सचिव, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान) ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ आगामी सात दिनों तक प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षा, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षण पद्धति तथा व्यक्तित्व विकास से संबंधित विविध शैक्षणिक एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे

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