चर्चित मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में विधिवत श्राद्ध कर प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया है रामचंद्र सिंह वहीं दरोगा हैं, जिन्होंने वर्ष 2012 में एक मामले के दौरान कोर्ट में खुद का डेथ सर्टिफिकेट दाखिल कर स्वयं को मृत घोषित कर दिया था और बाद में ‘ट्रेसलेस’ हो गए थे अधिवक्ता झा ने बताया कि चौदह वर्ष पूर्व दरोगा की सच्चाई उजागर करने के संकल्प के साथ उन्होंने जनेऊ तोड़ दिया था
बारह वर्ष बाद दरोगा को जीवित खोज निकालने पर उन्होंने पुनः जनेऊ धारण किया
चूंकि दरोगा अब भी कोर्ट रिकॉर्ड में मृत दर्ज है, इसलिए संकल्प के चौदह वर्ष पूरे होने पर गयाजी में पिंडदान, ब्राह्मण भोज सहित श्राद्ध कर्म किया गया
अधिवक्ता ने कहा कि यह श्राद्ध किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि दोषपूर्ण जांच और न्यायिक चूक के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध है